डीएनए एक्सप्लेनर
सीरिया में विरोधी समूहों के बीच संघर्ष जारी है, जिनमें से कुछ घातक भी साबित हुए हैं. बताया जा रहा है कि बशर अल असद को सत्ता से बेदखल करने वाले हयात तहरीर अल शाम (HTS) के लड़ाकों को बढ़ते प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है.
सीरिया में बशर अल असद को सत्ता से फेंकने से पहले, हयात तहरीर अल शाम नाम के संगठन ने दावा ही ये किया था कि सत्ता परिवर्तन की एक बड़ी वजह सुशासन स्थापित करना है. सवाल ये है कि क्या ऐसा हुआ? क्या बशर के सीरिया छोड़ देने के बाद अमन और सुकून है? इन तमाम सवालों के जवाब हमें तब न में मिलते हैं, जब हम सीरिया की मौजूदा स्थिति को न केवल देखते हैं. बल्कि उसका अवलोकन करते हैं.
दरअसल सीरियाई अधिकारियों का कहना है कि बशर अल असद की सरकार को गिराने वाले समूह का हिस्सा रहे उसके 14 सैनिक अपदस्थ तानाशाह के समर्थकों के साथ संघर्ष में मारे गए हैं. सीरिया के गृह मंत्रालय के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी सीरिया में घात लगाकर किए गए हमले में हयात तहरीर अल शाम (HTS) के सुरक्षा बलों के 10 अन्य सदस्य भी घायल हो गए.
बताया है रहा है कि वे कैदियों के खिलाफ फांसी के आदेश जारी करने के आरोपी असद के एक पूर्व अधिकारी को गिरफ्तार करने की कोशिश कर रहे थे. ध्यान रहे कि असद के पतन के बाद से, बदला लेने के लिए किए गए हमलों में दर्जनों सीरियाई मारे गए हैं - इनमें से कई अल्पसंख्यक अलावी समुदाय से हैं, जो शिया इस्लाम की एक शाखा है जिससे असद संबंधित हैं.
राजधानी दमिश्क से आ रही मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो, अलावी प्रदर्शनकारियों ने अभी बीते दिनों सुन्नी प्रति-प्रदर्शनकारियों के साथ संघर्ष किया, जबकि होम्स शहर में इसी तरह के प्रदर्शनों के कारण कर्फ्यू लगा दिया गया है.
रिपोर्टों से पता चला है कि कर्फ्यू एक रात के लिए लगाया गया था, ये कर्फ्यू क्यों लगा अभी तक इसकी वजह स्पष्ट नहीं हुई है. बता दें कि समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इसके विषय में सीरिया के नए वास्तविक शासक, एचटीएस समूह से सवाल पूछा रहा जिन्होंने इस सिलसिले में अभी तक कोई जवाब या प्रतिक्रिया नहीं दी है.
संगठन के नेता अहमद अल शरा (पूर्व में जोलानी) ने सीरिया के कई समूहों को एकजुट करने और एक ऐसी सरकार का नेतृत्व करने का वादा किया है जो सभी पृष्ठभूमि और धर्मों के प्रति सहिष्णुता को बढ़ावा देती है. बीते दिनों उन्होंने एक बैठक में भाग लिया जिसमें कई विद्रोही नेताओं ने अपने समूहों को भंग करने और सीरियाई रक्षा मंत्रालय के अधीन आने पर सहमति व्यक्त की थी.
सीरिया के वर्तमान हालात कैसे हैं इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मुल्क में अभी भी अशांति है, जिसमें राजधानी दमिश्क भी शामिल है, जहां क्रिसमस ट्री में आग लगाए जाने के बाद विरोध प्रदर्शन हुए.
कुर्द नेतृत्व वाले लड़ाकों ने तुर्की समर्थक विद्रोहियों के साथ किया संघर्ष
इस बीच, सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स ने बुधवार को यह भी कहा कि अमेरिका द्वारा समर्थित कुर्द नेतृत्व वाले सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेस (एसडीएफ) द्वारा एक ऑपरेशन के दौरान अलेप्पो के पूर्व में 12 तुर्की समर्थक लड़ाके मारे गए.
अभी बीते दिनों ही एसडीएफ ने घोषणा की कि उसने सीरिया की उत्तरी सीमा के पास पहले से नियंत्रित क्षेत्रों को वापस लेने के लिए तुर्की समर्थित सीरियन नेशनल आर्मी (एसएनए) के खिलाफ एक नया जवाबी हमला शुरू किया है.
ध्यान रहे कि इस महीने की शुरुआत में असद शासन के पतन के बाद से एसडीएफ और एसएनए के बीच संघर्ष तेज हो गया है, इस तनाव पर अपना पक्ष रखते हुए सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स का कहना है कि दोनों पक्षों के दर्जनों लोग मारे गए हैं.
वहीं तुर्की के राष्ट्रपति तैयप एर्दोगन इसे आन, बान, शान की लड़ाई के तौर पर देख रहे हैं. उन्होंने सीरिया के उत्तरी क्षेत्रों में अभी भी सक्रिय कुर्द समर्थित समूहों को धमकी दी है.
कुर्द समूहों को 'दफनाना' चाहते हैं एर्दोगन
गौरतलब है कि अंकारा ने महीने की शुरुआत में असद शासन के पतन के बाद से कुर्द वाईपीजी मिलिशिया को भंग करने पर जोर दिया है. राष्ट्रपति एर्दोगन ने तमाम सांसदों को संबोधित करते हुए अपनी संसद में कहा है कि, 'अलगाववादी हत्यारे या तो अपने हथियारों को अलविदा कह देंगे या फिर उन्हें अपने हथियारों के साथ सीरियाई भूमि में दफना दिया जाएगा.'
उन्होंने ये भी कहा कि, 'हम उस आतंकवादी संगठन को खत्म कर देंगे जो हमारे और हमारे कुर्द भाई-बहनों के बीच खून की दीवार खड़ी करने की कोशिश कर रहा है.' बता दें कि तुर्की, कुर्द वाईपीजी मिलिशिया (जो अमेरिका के सहयोगी एसडीएफ का मुख्य घटक है) को गैरकानूनी कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) मिलिशिया का विस्तार मानता है.
पीकेके को तुर्की, अमेरिका और यूरोपीय संघ द्वारा आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है. इसने 1984 से तुर्की राज्य के खिलाफ विद्रोह छेड़ रखा है. एसडीएफ, जिसके 2021 में लगभग 100,000 सदस्य होने का अनुमान था, उन समूहों में से नहीं है जो सीरियाई रक्षा मंत्रालय के अधीन आने और भंग होने के लिए सहमत हुआ.
जिक्र चूंकि सीरिया में व्याप्त तनाव का हुआ है. तो ये बता देना भी बेहद ज़रूरी है कि ऐसा बिलकुल नहीं है कि बशर अल असद के देश छोड़ने के बाद मुल्क के हालात बेहतर हैं.
सीरिया में लगातार अल्पसंख्यकों जिनमें ईसाई और शिया शामिल हैं, उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और उनपर तरह तरह के जुल्म किये जा रहे हैं. इसके अलावा बात यदि असद समर्थकों की हो तो उन्हें भी चुन चुन के निशाने पर लिया जा रहा है.
इन तमाम बातों के बाद जिक्र अगर सीरिया के नए शासक जोलानी का हो. तो अल कायदा के पूर्व एक्टिव सदस्य जोलानी अपने को लिबरल और रहमदिल दिखाने की भरसक कोशिश कर रहे हैं. लेकिन उनकी 'रहमदिली' का खामियाजा उन तमाम लोगों को भुगतना पड़ रहा है, जो अभी भी बशर और उनकी नीतियों के साथ हैं.
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